इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आई जे एम आर) न केवल भारत बल्कि संभवत: एशिया में प्राचीनतम जर्नलों में से एक है। यह वर्ष 1913 में आरम्भ हुआ था। जर्नल वर्ष 1913 में एक चौमाही प्रकाशन (वर्ष में 4 अंक) के रूप में शुरू हुआ जो वर्ष 1958 में दो माह में एक बार (वर्ष में 6 अंक) हो गया। तद्पश्चात् 1964 में इसे मासिक (वर्ष में 12 अंक) कर दिया गया। जर्नल विश्व की सभी प्रमुख करेण्ट अवेयरनेस (जागरूकता) एवं एलर्टिंग (सतर्कता) सेवाओं द्वारा इंडेक्सड (सूचित) किया जाता है। संलग्नक
इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च का प्रकाशन प्रतिमाह, प्रतिवर्ष 2 वाल्यूम एवं 12 अंकों के रूप में किया जाता है। आई जे एम आर में मूल अनुसंधान लेखों, रिव्यू लेखों, लघु पेपर्स एवं शार्ट नोट्स के रूप में पीयर रिव्यूड (समकक्ष पुनरीक्षण) गुणवत्तायुक्त जैवआयुर्विज्ञानी अनुसंधान प्रकाशित किया जाता है। रिसर्च लेटर्स को पीयर रिव्यू के पश्चात् करेसपॉन्डिंग सेक्शन में प्रकाशित किया जाता है। नियमित अंकों के अतिरिक्त स्पेशल(विशेष)अंक एवं सप्लीमेन्टस भी प्रकाशित किए जाते हैं।
शोध पत्रों (पेपर्स) के प्रकाशन हेतु विचार के लिए मापदण्ड :
शोध पत्रों को निम्न मापदण्डों को पूरा करना चाहिए - सामग्री मौलिक होनी चाहिए, प्रयोग की गई विधि मानक एवं उपयुक्त होनी चाहिए, परिणाम सुस्पष्ट (असंदिग्ध) तथा आंकड़ों एवं फोटोग्राफ्स के साथ प्रमाणित होने चाहिए, निष्कर्ष सन्तुलित तथा परिणामों पर आधारित होना चाहिए, विषय जैवआयुर्विज्ञान रुचि का तथा परिणामों का चिकित्सीय महत्व होना चाहिए। ऐसे शोध पत्र जिनमें मानव एवं जन्तुओं का प्रयोग हो उन्हें स्थानिक नीतिविषयक समिति से मंजूर होना चाहिए।
पॉण्डुलिपि (मेनुस्क्रिप्ट) की तैयारी - पॉण्डुलिपि को इंटरनेशनल कमेटी ऑफ मेडिकल जर्नल एडिटर्स (ICMJE) के दिशा निर्देशों, जो जैवआयुर्विज्ञानी जर्नलों में पॉण्डुलिपि भेजने के लिए एकसमान आवश्यकताएं हैं, के अनुरूप होना चाहिए तथा उसकी 3 कॉपियां (एक मूल एवं 2 फोटोकॉपियां)कम से कम चित्रों के 2 मूल सेट के साथ भेजी जानी चाहिए। सारांश(एब्सट्रेक्ट) बैकग्राउन्ड ऐण्ड ऑब्जेक्टिव (पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य) विधि (मेथड्स), परिणाम (रिजल्ट्स) एवं इन्टरप्रिटेशन ऐण्ड कन्क्लूज़न (व्याख्या एवं निष्कर्ष) को उपशीर्षक के अंतर्गत विभाजित (लगभग 250 शब्द) होना चाहिए।